नौ हिन्दुओं को अब्बास मोहम्मद ने जहरीली चाय पिलाकर मारा इस जघन्य वारदात को मीडिया और बॉलीवुड शब्द नैरेटिव हिन्दुओं के प्रति द्वेष सदा से ही स्पष्ट रहा है।

अब्बास ने वनमोरे भाइयों शिक्षक पोपट वनमोर (54) पशु चिकित्सक डॉ माणिक वनमोर (49) 74 वर्षीय उनकी मां दोनों भाइयों की पत्नियां और चार बच्चे दोनों घरों में सभी नौ लोगों की हत्या “पीर अब्बास” ने चाय में जहर दिया था मीडिया और बॉलीवुड का हिन्दुओं के प्रति द्वेष सदा से ही स्पष्ट रहा है। विशेषकर मीडिया सबसे अधिक हिन्दू विरोधी रही है और इसने शब्दों का ऐसा खेल खेला है कि जिसमें वास्तव में खेला हुआ है। पिछले दिनों महाराष्ट्र में सांगली में एक परिवार के नौ लोगों की आत्महत्या की बात से लोगों को लगा कि आर्थिक समस्या को लेकर आत्महत्या कर ली होगी और फिर जैसा होता है? कि हिन्दू भारत में इतना अधिक है कि दस बीस पंद्रह गायब हो गया तो क्या हुआ? बिहार में एक ब्राहमण परिवार की आत्महत्या जैसी इन्होनें भी कर ली होगी। मीडिया ने भी इसे आत्महत्या ही प्रसारित किया। परन्तु सत्य कुछ और ही था।सत्य झूठ के बादलों को चीर कर बाहर आने के लिए व्यग्र हो रहा था। और वह सत्य था कि यह भी किसी न किसी प्रकार उसी वर्ग का शिकार हुए थे जो काफिरों को अपने से नीचा मानता है।यह आत्महत्या नहीं थी बल्कि पूरे नौ लोगों को जहर देकर मारा गया था। और जहर किसने दिया था? अब सारा प्रश्न और सारा खेल इसी एक शब्द और नैरेटिव का है! जहर दिया गया था (“पीर अब्बास” ने जी हाँ “पीर अब्बास”) ने और मीडिया ने कहा कि “(तांत्रिक)” ने की थी नौ लोगों की हत्या (“तांत्रिक”और अब्बास~अब्बास कैसे”तांत्रिक”)?हो सकता है यह खेल न जाने कब से चलता चला आ रहा था और कितनी चलता चला हो देश में हिन्दी अंग्रेजी मीडिया चैनल न्यूज पोर्टल ने “तांत्रिक” शब्द का प्रयोग किया है। इसमें लिखा है कि °तांत्रिक°और उसके ड्राइवर सहयोगी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है!IMG 20220701 135041 -
पुलिस जांच के अनुसार “अब्बास मोहम्मद” जहरीली चाय पिलाकर मारा 
कोल्हापुर रेंज के आईजी मनोज कुमार लोहिया ने इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए यह जानकारी दी।पुलिस के अनुसार “तांत्रिक अब्बास मोहम्मद” उसके सहयोगी ड्राइवर ने 20 जून को म्हैसल गांव में दो भाइयों के परिवार के खात्मे की इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया था। थोड़ी थोड़ी दूरी पर मौजूद दोनों भाइयों के घरों में नौ लोगों के शव मिलने से आरंभिक रूप से कहा गया था कि कर्ज में डूबे होने से सामूहिक खुदकुशी की गई है? लेकिन अब पुलिस ने पूरे मामले का प्रदाफाश कर दिया है। मृतकों में शामिल वनमोर भाइयों में से एक शिक्षक था और दूसरा पशु चिकित्सक। था अब्बास मोहम्मद तांत्रिक ने 1 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे गुप्त धन खोजने का झांसा दिया था। यह झांसा देकर उसने दोनों भाइयों से करीब 1 करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे। इसके बाद तांत्रिक ने धन खोजने के लिए खूब ड्रामेबाजी की और जब वह विफल रहा तो वनमोरे बंधु पैसा लौटाने के लिए उस पर दबाव डालने लगे। तांत्रिक रुपये नहीं लौटाना चाहता था इसलिए उसने वनमोरे बंधुओं के पूरे परिवार को खत्म करने की साजिश रची और खौफनाक वारदात को अंजाम दे दिया। पुलिस के अनुसार अब्बास मोहम्मद अली बागवान ने 19 जून को वनमोरे बंधुओं के घर जाकर छिपे खजाने को खोजने के लिए तंत्र मन्त्र शुरू किया। फिर उसने उनके परिवार के सभी लोगों को छत पर भेजा।और एक एक करके नीचे बुलाकर चाय पिलाता गया।पुलिस का दावा है कि चाय में कोई जहरीला पदार्थ मिला हुआ था। जिसे पीने के बाद वनमोरे परिवार के लोग बेहोश होकर दम तोड़ते गए।नो लोगों के मिले थे शव सुसाइड नोट भी मिले सांगली पुलिस को दोनों भाइयों के घरों पर शव मिलने के साथ ही वहां सुसाइड नोट भी मिले थे। एक शव के पास एक शीशी भी मिली थी। ये देखकर पुलिस को पहले शंका हुई कि यह सामूहिक खुदकुशी का मामला है। सुसाइड नोट में कुछ साहू।कारों के भी नाम थे जिन्हें वनमोरे बंधुओं ने अपनी मौत का जिम्मेदार बताया था।
आत्महत्या के उकसाने पर 19 को गिरफ्तार किया पुलिस ने माना कि गड़ा या गुप्त धन पाने के चक्कर में वनमोरे बंधुओं ने लोगों से कर्ज लिया हुआ था। इस पर 19 लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। घटनास्थल पर मिली शीशियों में से एक शव के पास जहर की शीशी मिली थी।IMG 20220701 135123 -
पुलिस को इसलिए हुआ शक और हो गया भंडाफोड़
जांच के दौरान पुलिस को सुसाइड नोट में दर्ज विवरण पर शक हुआ। पुलिस का कहना है कि अक्सर सुसाइड नोट में खुदकुशी करने वाला पहले इसका कारण लिखता है। इसके बाद वह अपनी खुदकुशी के जिम्मेदार लोगों के नाम लिखता है। वनमोरे बंधुओं के केस में सुसाइड नोट में सबसे पहले कुछ लोगों के नाम लिखे थे। यह भी जिक्र नहीं था कि सामूहिक खुदकुशी क्यों की जा रही है? इसके बाद शक और गहराया और पुलिस ने तांत्रिक अब्बास पर शिकंजा कसा। पुलिस का मानना है कि वनमोरे भाइयों से तांत्रिक ने किसी बहाने से साहूकारों के नाम लिखवाए होंगे, ताकि इसी कागज का सुसाइड नोट का रूप देकर पूरे मामले को सामूहिक खुदकुशी साबित किया जा सके। सांगली पुलिस अधीक्षक दीक्षित गेडाम के अनुसार मुख्य आरोपी मोहम्मद अब्बास बागवान और ड्रावर सुरवासे को सोलापुर से गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर भादंवि की धारा 302 के तहत हत्या का केस दर्ज किया गया है। उनसे पूछताछ जारी है।
शब्दों के बहाने हिन्दू धर्म को बदनाम करने का खेल
इस प्रकरण में ही नहीं बल्कि हमने कई और प्रकरणों में देखा है कि कैसे शब्दों के माध्यम से हिन्दू धर्म को बदनाम किया जाता है। तांत्रिक शब्द को इतना हल्का कर दिया है कि अब लोग तंत्र विद्या पर भी संदेह करने लगे हैं। तांत्रिक शब्द सुनकर जो छवि उभरती है। वह किसकी उभरती है। हम सभी जानते हैं।ऐसा नहीं है। कि एक ही शब्द से खेल होता है। उदयपुर की घटना में भी शब्दों के माध्यम से ही न केवल घटना को हल्का किया जा रहा है बल्कि कहीं न कहीं हिन्दुओं को ही दोषी ठहराया जा रहा है।पूरी की पूरी सेक्युलर मीडिया और पत्रकार उदयपुर की घटना को धर्म के कट्टरपन की घटना बता रही है। धर्म नाम सुनते ही क्या छवि आँखों में उभरती है। यह भी हम सभी को पता है। धर्म सुनते ही हिन्दू जैन या बौद्ध धर्म की छवि उभरती है। विशेषकर हिन्दू अब ऐसे में जब कन्हैया लाल तेली के हत्यारों के विषय में जिन्होनें यह हत्या पूरी तरह से अपने नबी के उस अपमान का बदला लेने के लिए की है। जो कथित रूप से नुपुर शर्मा ने किया था, यह लिखा जा रहा है कि यह हत्या “धर्म के कट्टर” होने का परिणाम है। तो कहीं न कहीं उस मजहबी वहशीपन को एक आड़ दी जा रही है।जैसे “अब्बास” को “तांत्रिक” बनाकर उसके द्वारा की गयी नौ हत्याओं का बोझ बहुत ही सरलता से हिन्दू धर्म की तंत्र विद्या पर डाल दिया गया है। वैसे ही “मजहबी कट्टरता” का बोझ उठाकर धर्म कहकर हिन्दुओं पर डाला जा रहा है! और इस खेल में हर कोई हिन्दुओं के विरुद्ध है? ट्वीट किया: उन्हें सूक्ष्म स्तर पर लड़ाई करना आता है और हिन्दुओं को कैसे नीचा दिखाना है। यह भी पता है और यह शब्दों से अधिक बेहतर तरीके से कैसे किया जा सकता है? तभी “अब्बास” “तांत्रिक” हो जाता है और “मजहबी” गला रेतना धर्म की कट्टरता हो जाता हैं।       
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