बिहार के मोबाइल लैपटाप कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद निर्माताओं विक्रेताओं के लिए नया नियम विक्रेताओं ध्यान दे.

बिहार के मोबाइल लैपटाप कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद निर्माताओं विक्रेताओं के लिए नया नियम विक्रेताओं ध्यान दे.बिहार के मोबाइल लैपटाप कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद निर्माताओं विक्रेताओं को निर्देश दिया है। नियम बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने राज्य के सभी मोबाइल लैपटाप एवं कंप्यूटर विक्रेताओं को निर्देश दिया है। कि वे दुकान में पुराने मोबाइल लैपटाप एवं कंप्यूटर के संग्रह केंद्र खोले। संग्रह केंद्र 30 जून से पहले खोलकर प्रदूषण बोर्ड को सूचित करें। ऐसा नहीं करने पर राज्य में मोबाइल लैपटाप कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद निर्माताओं को बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है। प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डा. अशोक कुमार घोष का कहना है। कि ई-कचरा काफी तेजी से बढ़ रहा है। 30 जून तक सभी मोबाइल लैपटाप कंप्यूटर एवं इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद निर्माताओं को निर्देश दिया है कि अगर ऐसा नहीं करते हैं।तो उनके उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए?राज्य सरकार के पास सिफारिश की जाएगी।बिहार में प्रति व्यक्ति करीब 100 से 200 ग्राम ई-कचरा निकलता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में बिहार में प्रतिवर्ष एक लाख टन से अधिक ई-कचरा निकल रहा है। 2013 में ही ई-कचरे का आंकलन शुरू कराया। उस समय आई रिपोर्ट में बिहार के महज चार शहरों में 23 हजार टन से अधिक ई-कचरा फेंका जा रहा था। कि उत्तर दक्षिण और मध्य बिहार में 445 किलोमीटर में गंगा की धारा बहती है और ई-कचरे से वह प्रदूषित हो रही हैं। गंगा राष्ट्रीय धरोहर है। उसमें ई-कचरा न जाए ऐसी पर्यावरण संतुलन बना रहे। कि एक अनुमान के मुताबिक इस साल के अंत तक 1.25 लाख टन ई-कचरे का उत्सर्जन होना है। वर्तमान में कचरा संग्रह के लिए राज्य में 150 से अधिक कचरा संग्रह केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक कचरा इकट्ठा करने की जिम्मेदारी संबंधित कंपनियों को दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों के उच्च स्तर पर करनी होगी

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